सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज का देश की इबादतगाहों और ज्ञानवापी मस्जिद विवाद पर एक बेहद अहम और बेबाक बयान
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(काशिफ सुल्तान) सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस दीपक गुप्ता ने देश की इबादतगाहों (Places of Worship) और ज्ञानवापी मस्जिद विवाद पर एक बेहद अहम और बेबाक बयान दिया है। उनके इस बयान ने न्याय व्यवस्था के रवैये पर एक बड़ी बहस छेड़ दी है।
जस्टिस गुप्ता ने याद दिलाया कि राम जन्मभूमि (अयोध्या) फैसले के वक्त सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा था कि अब देश में किसी भी अन्य इबादतगाह या पूजा-स्थल के विवाद को दोबारा नहीं खोला जाएगा। लेकिन, हैरानी और अफसोस की बात यह है कि जिस जज ने वह फैसला लिखा था, उसी ने बाद में ज्ञानवापी मस्जिद मामले में ASI सर्वे का आदेश दे दिया।
पूर्व जज का साफ मानना है कि इसी एक फैसले ने देश में नए सिरे से मंदिर-मस्जिद मुकदमों की बाढ़ ला दी है। उन्होंने इसे एकतरफा बताते हुए कहा कि मेरी नज़र में यह फैसला सिर्फ बहुसंख्यक समुदाय को खुश करने के लिए लिया गया था।
जस्टिस दीपक गुप्ता का यह बयान मुस्लिम समुदाय के उस दर्द और बेबसी की तस्दीक करता है, जहां उन्हें अपनी सदियों पुरानी मस्जिदों के छिन जाने का खौफ सता रहा है। न्याय के सबसे बड़े मंदिर के रवैये पर खुद एक पूर्व जज का यह सवाल उठाना बेहद गंभीर बात है।
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