(काशिफ सुल्तान) शामली के चर्चित धर्मांतरण और शादी के मामले में अब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ऐसा सवाल खड़ा कर दिया है, जिसे नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा।

इन सवालों का जवाब सोशल मीडिया की बहस से नहीं, आयुष के स्वतंत्र बयान और अदालत की निगरानी में होने वाली कार्यवाही से मिलना चाहिए। क्योंकि किसी बालिग इंसान की जिंदगी, शादी और आस्था का फैसला उसकी अपनी मर्जी से होना चाहिए—किसी परिवार, समाज या भीड़ के दबाव से नहीं।
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