काशिफ सुल्तान (रुड़की) ये तय हो गया है आजम खान की यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर चलेगा. रामपुर डीएम ने मैनेजमेंट से कहा है कि 15 दिन में खुद ढहा दो , वरना हम ढहा देंगे.यूनिवर्सिटी कोई छोटा कैम्पस नहीं है. अन्दर 40 अलग-अलग बिल्डिंग हैं. इन्हीं बिल्डिंगों में क्लास रूम हैं, पढाई से लिए डिपार्टमेंट हैं. आरोप है कि 40 में से 38 बिल्डिंग बिना नक़्शे के बनाई गईं.
शिक्षण संस्थानों की कमी के बीच आजम खान की अपनी सोच थी कि अपने लिए घर, फार्म हाउस, महल नहीं.बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए यूनिवर्सिटी बनायेंगे. बनाई भी.2017 तक यूनिवर्सिटी में इंजीनियरिंग, बीफार्मा, बीएससी, बीए सहित 25 कोर्स की पढ़ाई हुई.
सरकार बदली. पढ़ाई बंद हो गई. और आजम खान शासन के पहले शिकार बने. बेटे सहित अब तक जेल में हैं.यूनिवर्सिटी गिराई जा रही है क्योंकि यूनिवर्सिटी की नींव जिसने रखी उसका नाम आज़म खान है. सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोगों के लिए के लिए इतना ही काफी है.
चलो मान लिया कि नक्शा नहीं था. कुछ और भी परमीशन सम्बन्धी गड़बड़ियाँ रही होंगी.लेकिन क्या ये ठीक नहीं रहता कि है तो आखिर एक शिक्षण संस्थान ही. सरकार अपने कब्जे में ले लेती. नाम बदल देती. सब कुछ अपने हिसाब से कर लेती.अपनी मर्जी से कोई भी नाम रख लेती , खुद फिर से फीता काट लेती.काम से काम शिक्षण संस्थान तो मोजूद रहता और पढ़ने वालों को भी दिक्कत नहीं होती ।कैसे भी बच्चों की पढ़ाई जारी रहती.क्या ये इतना मुश्किल था. हाँ मुश्किल तो है. जब, वैज्ञानिक सोच न हो, देश के लिए दूरदर्शिता न हो.

