काशिफ सुल्तान (रुड़की) मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर से जारी सूची के अनुसार, देहरादून जिले में मौजूद मतदाताओं में से 33 फीसदी मतदाताओं की जानकारी में विसंगतियां पाई गई हैं. सबसे ज्यादा हरिद्वार जिले में मौजूद मतदाताओं में से 31 फीसदी मतदाताओं की जानकारी में विसंगतियां पाई गई हैं. कुल मिलाकर प्रदेश में 27 फीसदी यानी 19 लाख 4 हजार 380 मतदाताओं की ओर से दी गई जानकारी में त्रुटियां पाई गई हैं. लिहाजा इन सभी मतदाताओं को नोटिस जारी किया जाएगा. नोटिस की सुनवाई के लिए न्याय पंचायत स्तर पर क्लस्टर में कैंप लगाए जाएंगे. इसके साथ ही मैदानी क्षेत्र के मतदाताओं की सुविधा के लिए तहसील के अलावा नगर निगम, नगर पंचायत और वार्ड स्तर पर भी कैंप लगाए जाएंगे.
उत्तराखंड में एसआईआर के पहले चरण की प्रक्रिया संपन्न होने के बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी कर दी है. जारी मतदाता सूची के अनुसार, प्रदेश में 71 लाख 33 हजार 785 मतदाता हैं. जिनमें से 19 लाख 4 हजार 380 मतदाता ऐसे हैं जिनके गणना पत्र में त्रुटियां पाई गई है. यानी प्रदेश भर में ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल कुल मतदाताओं में से 27 फीसदी मतदाताओं के गणना फॉर्म में विसंगतियां पाई गई हैं. जिसके कारण संबंधित ईआरओ की ओर से नोटिस जारी किया जाएगा. मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक, आठ तरह की त्रुटियां पाई गई हैं, जिस कारण नोटिस जारी किया जाएगा.
प्रदेश में जिन 19 लाख मतदाताओं को नोटिस जारी किया जाना है, उसके पीछे मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने 8 वजह बताई है. जिसमें, मतदाता और उनके माता-पिता के बीच का आयु अंतर 15 साल से कम है. मतदाता एवं उनके माता-पिता के बीच आयु का अंतर 50 साल से अधिक है. मतदाता और उनके दादा-दादी/ नाना- नानी के बीच आयु का अंतर 40 साल से कम है. दो भाई या भाई बहन के बीच आयु का अंतर 9 माह से कम है. एक ही मतदाता के साथ प्रोजेनी (गार्जन) के रूप में 6 से ज्यादा हैं. मतदाता के संबंधी के नाम में कोई त्रुटि, मतदाता के खुद के नाम में कोई त्रुटि, लास्ट एसआईआर की मतदाता सूची में अनमैप्ड शामिल है.
ड्राफ्ट मतदाता सूची में जो 71 लाख 33 हजार 785 मतदाता हैं, उन मतदाताओं में से 19 लाख मतदाता ऐसे हैं, जिनके फॉर्म में त्रुटियां पाई गई है, जिन्हें नोटिस जारी किया जाएगा और उनसे जवाब मांगा जाएगा. हालांकि, जब नोटिस जारी किया जाएगा, तभी उन्हें पता चल सकेगा कि किन वजहों से नोटिस जारी किया गया है. अगर किसी व्यक्ति को नोटिस नहीं आता है तो इसका मतलब है कि उनका नाम और जानकारी सही है. हालांकि, ये सभी नोटिस ऑनलाइन जनरेट किए जाएंगे. इसके बाद उनको प्रिंटकर बीएलओ के जरिए, मतदाताओं तक पहुंचाया जाएगा.

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