
भौगोलिक दृष्टि से रुड़की एक मैदानी और ढलान वाला क्षेत्र है, जहाँ उचित नेचुरल ड्रेनेज (प्राकृतिक जल निकासी) की सख्त जरूरत है। आईआईटी (IIT) जैसे विश्व प्रसिद्ध संस्थान को अपनी गोद में समेटे हुए इस शहर का ड्रेनेज सिस्टम पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका है। जब तक मास्टर प्लान बनाकर स्थाई समाधान नहीं होगा, तब तक हर बारिश रुड़की को डुबाती रहेगी।
आज शहर का कोई कोना सुरक्षित नहीं है।
रामनगर (Ram Nagar) और आसपास की गलियां
सिविल लाइन्स (Civil Lines) के निचले हिस्से
गणेशपुर (Ganesh Pur) और मालवीय चौक के पास का क्षेत्र
आजाद नगर (Azad Nagar) और पुरानी तहसील विश्वकर्मा चौक
चाउ मंडी सैनिक कॉलोनी जैसी कई बाहरी और अंदरूनी बस्तियां
रुड़की का राजनीतिक कद छोटा नहीं है। हमारे पास कैबिनेट मंत्री हैं, दर्जन भर के आसपास राज्यमंत्री हैं और राज्यसभा सांसद भी हैं। इतने रसूखदार जनप्रतिनिधि होने के बावजूद रुड़की की जनता बूंद-बूंद बारिश में नरकीय जीवन जीने को मजबूर क्यों है? कोई स्थाई (Permanent) हल क्यों नहीं निकाला जाता? क्यों हर बार सिर्फ कागजी वादे और अस्थाई मरम्मत करके पल्ला झाड़ लिया जाता है?
“यह सिर्फ पानी का भराव नहीं है, यह हमारे टैक्स के पैसों का भराव है जो भ्रष्टाचार और लचर प्लानिंग की भेंट चढ़ रहा है।”
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